TDS Full Form in Hindi

भारत सरकार के द्वारा टैक्स की चोरी को रोकने के लिए टीडीएस का प्रावधान किया गया है | यह सरकार द्वारा लिया गया इनडायरेक्ट टैक्स होता है | सामान्यतः टीडीएस को सैलरी से जोड़कर देखा जाता है | जिन लोगों को अच्छा वेतन प्राप्त होता है | उनके वेतन में टीडीएस की कटौती की जाती है | इसके अतिरिक्त बैंक के द्वारा कई लेन- देन पर टीडीएस की कटौती की जाती है | इस पेज पर TDS Full Form in Hindi , टीडीएस का क्या मतलब होता है, के विषय में जानकारी प्रदान की जा रही है |

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टीडीएस (TDS) का फुल फॉर्म

टीडीएस (TDS) का फुल फॉर्म “Tax deducted at source” होता है | हिन्दी में इसे ‘स्रोत पर टैक्स कटौती’ के नाम से जाना जाता है | यहां स्रोत का अर्थ कमाई का स्रोत है | इनकम टैक्स एक्ट के अंतर्गत कमाई के 5 स्रोत है, यह इस प्रकार है-

  • किसी संस्थान से मिलने वाला वेतन (Income as salary)
  • अपने कारोबार या पेशे से आमदनी (Income from business/profession )
  • किसी संपत्ति से किराए के रूप में आमदनी (Income from house property)
  • किसी संपत्ति को बेचने पर उसके लाभ के रूप में आमदनी (Income as capital gains)
  • ब्याज, कमीशन, लाभांश वगैरह के रूप में आमदनी (Income From other sources)

टीडीएस सिस्टम के अंतर्गत किसी संस्थान या व्यक्ति के द्वारा सैलरी या पेमेंट देने से पहले ही आपका टैक्स काट लिया जाता है | टैक्स कटने के बाद बची धनराशि आपको सैलरी या पेमेंट के रूप में दे दी जाती है | इस प्रकार से आपकी आय के स्रोत पर कटौती की जाती है | इस  व्यवस्था को आयकर की भाषा में Tax Deducted at Source या स्रोत पर कर कटौती कहा जाता है | यह टैक्स पेमेंट के कई तरीकों में से एक तरीका है | इसके अतिरिक्त एडवांस टैक्स और सेल्फ असेसमेंट टैक्स भी टैक्स चुकाने की विधि हैं |

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टीडीएस किस पर कटता

टीडीएस आपकी आमदनी पर इस प्रकार से काटा जाता है-

  • वेतन- यदि आप किसी कंपनी या संस्थान में एक कर्मचारी के रूप में कार्य करते है तो आपकी एक वर्ष की सेलरी यदि 5 लाख रुपए से अधिक होती है तो आपका संस्थान या कम्पनी आपके वेतन से टीडीएस को काटता है |
  • Interest Payments- यदि आपकी जमा राशि पर 40,000 रुपए से अधिक ब्याज प्राप्त हो रहा है तो बैंक के द्वारा टीडीएस की कटौती की जाती है |
  • Commission payments- यदि किसी संस्थान या कम्पनी के द्वारा कोई कार्य कराने पर आपको अधिक कमीशन प्राप्त होता है, तो आपसे टीडीएस की कटौती की जायेगी |
  • Rent payments- यदि आपको मकान के किराये के रूप में 20,000 रुपए प्रति माह से अधिक की आय हो रही है, तो आपसे टीडीएस की कटौती की जाएगी |
  • Consultation fees- यदि आप वकील,चार्टड एकाउंटेंट, फाइनेंसियल प्लानर के रूप में परामर्श शुल्क प्राप्त करते है, तो आपसे टीडीएस की कटौती की जाएगी |
  • Professional fees- यदि आपको किसी कम्पनी ने पेशेवर विशेषज्ञता के आधार पर हायर कर रखा है तो आपसे टीडीएस की कटौती की जाएगी |

यह सभी आय के स्रोत का व्यावसायिक स्तर पर प्रयोग किया जाता है, तो ही टीडीएस की कौटती की जाती है | वकील, डॉक्टर या अन्य परामर्श दाता के द्वारा जो परामर्श शुल्क लिया जाता है, उस पर टीडीएस की कटौती का कोई नियम नहीं है | यदि किसी कम्पनी के द्वारा यह सेवाएं ली जाती है तो वह आपको फीस का भुगतान टीडीएस काट कर करेगी |

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टीडीएस के नियम (TDS Rules)

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के द्वारा टीडीएस काटने और जमा करने के लिए कुछ नियम का निर्धारण किया गया है | इन नियमों का पालन न करने पर जुर्माना, ब्याज या लेट फीस को देना पड़ता है |

कटौती के लिए

धनराशि देने की अंतिम तिथि या वास्तविक धनराशि की तिथि जो भी पहले हो उसके अनुसार टीडीएस काट लेना अनिवार्य है | विलंब करने पर 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से ब्याज देना पड़ता है |

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जमा के लिए

जो व्यक्ति टीडीएस की कटौती करके धनराशि को एकत्रित करता है उसे अगले महीने की 7 तारीख तक सरकार के पास उस धनराशि जमा करना अनिवार्य होता है | यदि इस तिथि तक जमा नहीं किया जाता है तो पूरी धनराशि पर प्रतिमाह 1.5 प्रतिशत की दर से ब्याज देना पड़ता है |

रिटर्न के लिए

प्रत्येक माह जो भी टीडीएस की कटौती की जाती है उसका रिटर्न हर तिमाही के अगले महीने की अंतिम तिथि तक जमा किया जाना अनिवार्य होता है अथार्त फाइनेंसियल ईयर की 31 जुलाई, 31 अक्टूबर, 31 जनवरी, और 31 मई तक जमा करना होगा | यदि यह नहीं जमा किया जाता है तो 200 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से लेट फीस देनी होती है यह नियम आयकर अधिनियम 234E के अनुसार है | इस लेट फीस की धनराशि कुल टैक्स से अधिक नहीं राखी जाती है |

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टीडीएस सर्टिफिकेट (TDS Certificate)

टीडीएस काटने वाला व्यक्ति, संस्था या कम्पनी के द्वारा आपको टीडीएस काटने के सम्बन्ध एक सर्टिफिकेट प्रदान करता है | आयकर अधिनियम के अनुसार यह उसका उत्तरदायित्व है कि वह आपको इसका प्रमाण पत्र प्रदान करे | इसमें सरकार को कितना टीडीएस जमा किया गया है उसकी जानकारी होनी चाहिए | इस सर्टिफिकेट की सहायता से आप रिटर्न जमा करते वक्त या विभागीय जांच-पड़ताल पर टैक्स के भुगतान का दावा कर सकते है | इस प्रमाण पत्र को आपको सुरक्षित रखना चाहिए  जिससे आपको भविष्य में किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े |

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