FIR Full Form in Hindi

दुनिया में बहुत से लोग ऐसे जो कई अपराधों से घिरे हुए होते है | इसलिए ऐसे लोगों के लिए एक पुलिस डिपार्टमेंट बनाया गया है, जिसमें लोगों के द्वारा किये गए अपराधों के लिए एफआईआर लिखी जाती है, एफआईआर एक दस्तावेज होता है | यह एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसके आधार पर अपराध करने वाले अपराधी को सजा दिलाने के लिए पुलिस कार्यवाही शुरू करती है। इसके बाद उसे उसके जुर्म के मुताबिक़ सजा देती है | जैसे- जब किसी सामान  की चोरी हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में बीमा क्लेम करने के लिए एफआईआर अवश्य लिखी जाती है, जिसके बाद ही आगे की कार्यवाही शुरू की जाती है |  इसलिए यदि आप भी एफआईआर के विषय में जानना चाहते हैं, तो यहाँ पर आपको  FIR Full Form in Hindi , एफआईआर (FIR) का क्या मतलब होता है | इसकी पूरी जानकारी प्रदान की जा रही है |

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एफआईआर (FIR) का फुल फॉर्म

एफआईआर (FIR) का फुल फॉर्म “First Information Report” होती है और  इसे हिंदी भाषा में  “पहली/प्रथम सूचना रिपोर्ट” कहा जाता है | इसी के आधार पर अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही की शुरुआत की जाती है |

एफआईआर (FIR) का क्या मतलब होता है ?

जब देश में कोई व्यक्ति किसी प्रकार का अपराध करता है और  इसके बाद जब कोई दूसरा व्यक्ति उसके खिलाफ पुलिस को दोषी व्यक्ति के अपराध के बारे में जानकारी प्रदान करता है, तो जानकारी देने वाले व्यक्ति की तरफ  से  पुलिस सबसे पहले उसकी शिकायत को एक दस्तावेज पर  लिखता  है , जिसे एफआईआर के नाम से जाना जाता है |  एफआईआर दर्ज करने के बाद एक संज्ञेय अपराध में, एक पुलिस अधिकारी को वारंट के बिना गिरफ्तारी करने का अधिकार प्राप्त होता है, लेकिन इसके पहले पुलिस द्वारा दर्ज की गई  FIR की एक Copy पीड़ित व्यक्ति को भी दी जाती है | First Information Report (FIR) एक बहुत  ही आवश्यक दस्तावेज होता है, क्योंकि  इस दस्तावेज से ही आपराधिक न्याय की प्रक्रिया में मदद  मिलती है ! वहीं यदि एक बार  एफआईआर कर ली जाती हैं तो इसके बाद इसे  उच्च न्यायालय या भारत के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर छोड़ दिया जाता है और एक बार एफआईआर दर्ज हो जाने के बाद एफआईआर को किसी भी बेस पर बदला नहीं जा सकता है |

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किन मामलों में दर्ज की जाती है एफआईआर?

 देश में लोगों द्वारा किये जाने वाले अपराध दो तरह के होते हैं । पहला तो संज्ञेय अपराध और दूसरा असंज्ञेय अपराध।


1.संज्ञेय अपराध 

संज्ञेय अपराध  वह अपराध होता है, जो लोगों द्वारा गंभीर किस्म के अपराध किये जाते  हैं। ऐसे मामले में गोली चलाना, मर्डर व रेप आदि जुर्म शामिल होते हैं, जिनमें सीधे पुलिस द्वारा एक ही एफआईआर दर्ज की जाती है। इसके बाद सीआरपीसी की धारा-154 के तहत पुलिस को संज्ञेय मामले में सीधे तौर पर एफआईआर दर्ज करके उसी के आधार पर ही कार्यवाही शुरू कर दी जाती है |

2.असंज्ञेय अपराध 

असंज्ञेय अपराध वो अपराध कहे जाते है, जो मामूली अपराध होते हैं, जिसमें  मसलन मामूली मारपीट आदि  शामिल किये जाते हैं। ऐसे मामले में सीधे तौर पर एक ही बार में पुलिस द्वारा एफआईआर नहीं दर्ज की जाती है , बल्कि एफआईआर दर्ज करने से पहले इसकी शिकायत को मैजिस्ट्रेट को भेजा जाता है और इसके बाद मैजिस्ट्रेट द्वारा इस मामले में आरोपी को समन जारी किया जाता  है। फिर  दोषी व्यक्ति के मामले की शुरुआत की जाती है।  

एफआईआर कैसे दर्ज कराई जाती है 

यदि आपके द्वारा किसी भी प्रकार का कोई भी अपराध हो  जाता है, तो कोई दूसरा व्यक्ति आपके खिलाफ आपसे किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त किये बिना ही पुलिस में एफआईआर दर्ज करा सकता है और वहीं यदि आपको किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी होती है, और आप स्वयं जाकर एफआईआर नहीं दर्ज कराना चाहते हैं तो आपका घटना का चश्मदीद या कोई रिश्तेदार भी आपकी एफआईआर दर्ज करा सकता है क्योंकि इमर्जेंसी की स्थिति में पुलिस फोन कॉल या ई-मेल के आधार पर भी एफआईआर दर्ज कर सकती है लेकिन इसके लिए आपको पुलिस को  घटना की तारीख और समय एवं आरोपी का  पूरा विवरण देना होता है , क्योंकि एफआईआर दर्ज कराने में इन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है | एफआईआर दर्ज होने के बाद शिकायतकर्ता को इसकी मुफ्त में एक कॉपी भी प्रदान की जाती है। एफआईआर में लिखा क्राइम नंबर भविष्य में रेफरेंस के तौर पर उपयोग में लाया जाता है। FIR की कॉपी पर थाने की मुहर व पुलिस अधिकारी के हस्ताक्षर होने अतिआवश्यक है |

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यहाँ पर हमने आपको एफआईआर (FIR) का क्या मतलब होता है? इसके विषय में जानकारी उपलब्ध कराई है |  यदि इस जानकारी से रिलेटेड आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्न या विचार आ रहा है, अथवा इससे सम्बंधित अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो कमेंट बाक्स के माध्यम से पूँछ सकते है, हम आपके द्वारा की गयी प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रहे है |

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